Thursday, May 23, 2013

जवानी


जिस उम्र की फितरत है इतिहास बनाना
जिस उम्र के करतब का बनता है तराना
उसे जोश, जवानी या जूनून कह के पुकारो
उसकी खुदी से बनता संवरता है ज़माना .
------           --------         -------

बिलकुल अलग अंदाज अलग बात हमारी
दिन का उजाला रहे या रात अंधियारी
बस एक बार हमको आजमाके देख लो
खुद ही जन जाओगे औकात हमारी .

Monday, May 20, 2013

विरह का बादल बहा दे काजल

विरह का बादल बहा दे काजल
पलकों की छतरी लगा दो ना
तरसे नयनवा मोरे सजनवा
आकर रूप दिखा दो ना
रूत बसंती आँख में सावन
तुम बिन सूना सूना आँगन
चंचल हवाएं लचकती डाली
भंवरा चूमे आली आली
दर्दे जवां में ऐसी फिजा में
आओ या मुझको बुला लो ना
रात कटे आँखों में हम दम
भाये ना भोर का भीगा मौसम
आस लगाये सबसे लडूंगी
सपने मिलन की मैं बूनूंगी
कोई हँसे ना कुछ भी कहे ना
आकर रीति निभा दो 

Friday, May 17, 2013

पल भर की आज उनसे मुलाकात हो गयी

पल भर की आज उनसे मुलाकात हो गयी
जो न चाहते थे करना वही बात हो गयी .

शिकवे शिकायतों से क्या फायदा है अब
आसूं से लड़ते- लड़ते लब की मात हो गयी .

यौवन के पहले मोड़ पर ये क्या हो गया
कुछ पग ही तो चले थे क्यों रात हो गयी .

रिश्तों का दर्द मेरे दामन में भर गए
घुट-घुट के अब तो जीना कायनात हो गयी .

क्या दर्द है लगन का कैसे किसे बताऊँ
मेरा ख्वाब मेरी खातिर हवालात हो गयी . 

Saturday, March 9, 2013

बोया पेड़ बबूल का....?

प्रातःकाल दैनिक में प्रकाशित मेरा यह समसामयिक लेख

प्रातःकाल दैनिक में प्रकाशित मेरा यह समसामयिक लेख

Saturday, February 16, 2013

क्या स्व'छ दिखता किचन कीटाणुमुक्त भी है ?

 क्या आपका साफ सुथरा दिख रहा किचन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी स्व'छ है ? बिल्कुल नहीं, आपका किचन केवल ऊपरी तौर पर साफ है, ना कि पूरी तरह से कीटाणुओं से मुक्त। यह खुलासा 12 फरवरी को मुंबई में आयोजित 'किचन की सफाई और स्वास्थ्य अध्ययनÓ विषयक प्रेस कांफ्रेंस में इंडियन मेडिकल अकादमी ने किया।
अकादमी के 500 डॉक्टरों ने मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकता, बंगलौर, हैदराबाद और पुणे में सर्वेक्षण कर पाया कि 87 प्रतिशत गृहिणियों ने केवल गंदगी, धूल, घी और तेल की सफाई को ही पर्याप्त माना, जबकि 90 प्रतिशत ने प्रत्यक्ष रूप से दिख रहे साफ किचन को ही स्वास्थ्य की दृष्टि से भी स्व'छ माना। केवल 13 प्रतिशत ने महसूस किया कि किचन से कीटाणु और जीवाणुओं की सफाई महत्वपूर्ण है । इसके विपरीत 100 प्रतिशत डॉक्टरोंने किचन में प्रत्यक्ष दिख रही सफाई को अल्प स्व'छता ठहराते हुए स्वास्थ्य विज्ञान की दृष्टि से अस्व'छ बताया । बकौल डॉक्टर प्रीतैश कौल (सलाहकार इंडियन मेडिकल अकादमी ), '' आम भारतीयों के बीच रसोई घर की सफाई के संदर्भमेंप्राथमिकता विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करने वाले कीटाणुओं से मुक्ति पाने के बजाय प्रत्यक्ष दिखती सफाई से जुड़ी है ।ÓÓ
इसके अलावा बाथरूम की सफाई 2 प्रतिशतने दैनिक, 18 प्रतिशतने द्विसप्ताहिक, 36 प्रतिशतने सप्ताहिक, 40 प्रतिशतने पाक्षिक और 4 प्रतिशतने मासिक अंतराल पर करना बताया । जबकि रसोई घर की सफाई के संदर्भ में 0 प्रतिशतदैनिक, 0 प्रतिशतद्विसप्ताहिक, 1 प्रतिशतसप्ताहिक, 8 प्रतिशतपाक्षिक और 14 प्रतिशतने माना कि मासिक आधार पर की जानी चाहिए। गौरतलब है कि सर्वेक्षण में लिविंग रूम और बेडरूम की सफाई की आवृत्ति सबसे ज्यादा पायी गयी, उनका मानना था कि यह क्षेत्र अधिक निरीक्षण वाला होता है ।
जनरल मेडिकल के एम.डी. डॉ. वेंक्टेश्वर कहते हैं कि काफी संख्या में लोग यह मानते हैं कि बाहर खाने से आंतों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उनमें कुछ तथ्य यह भी है कि यदि स्वयं के खाना पकाने के स्थान को कीटाणुमुक्त नहीं किया गया, तो अपना किचन भी अस्वस्थता का कारण बन सकता है। सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि किचन से जुड़े उपकरणों की तुलना में बेसिन, मोरी आदि की सफाई कम की जाती है। इसके अलावा अधिकांश भारतीय बर्तन, किचेन स्लैब्स, टावेल आदि की सफाई के लिए डिटर्जेंट पावडर, बार्स, लिक्विड और सादे पानी का उपयोग करते हैं, लेकिन जीवाणुरोधी प्रयोगकर्ताओं का अनुपात केवल 5प्रतिशत से 8 प्रतिशत के बीच है। जबकि डाक्टरों ने जीवाणुरोधी बार और लिक्विड का प्रयोग करने का सलाह दिया है । सर्वे में डॉक्टरों ने बताया है कि बर्तन साफ करने के लिए प्रयुक्त होने वाला कपड़ा यदि अ'छी तरह से विसंक्रमित नहीं है, तो बर्तन भी दूषित हो जाएंगे । सर्वे दल के डॉक्टरों ने संक्रमण फैलाव के प्रमुख कारणों में किचन और उससे संबंधित उपकरणों सहित अस्व'छ हाथ और दूषित कपड़ों के प्रयोग को बताया है।

Tuesday, July 31, 2012

भाड़ में जाय विश्व स्तरीय सुविधा, यात्रियों को पहले सुरक्षा चाहिए

भाड़ में जाय विश्व स्तरीय सुविधा 
यात्रियों को पहले सुरक्षा चाहिए
www.pratahkal.com

नई दिल्ली से चेन्नई जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस के स्लीपर बोगी में लगी आग ने एक बार फिर भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी । रेलवे प्रशासन रेल यात्रियों की सुरक्षा की दिशा में अपने प्रयासों के चाहे कितने भी दावे करे, लेकिन व्यवहारिक रूप से वे कितने अमल में लाये जा रहे हैं, इसकी वास्तविकता से हर रेल यात्री अच्छी तरह परिचित है । तमिलनाडु एक्सप्रेस में आग की शुरुआत का स्थान और समय टॉयलेट के पास सुबह ४.३० बजे बताया जा रहा है । आग का कारण शार्ट सर्किट हो या कुछ और, लेकिन एक गौरतलब बात यह है कि सुबह के समय अवैध रूप से ट्रेनों में लोकल चाय बेचने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ट्रेन में आग या ज्वलनशील पदार्थों पर रोक के बावजूद ये चाय गर्म करने के लिए सिगड़ी या टीन वगैर के घुमावदार चुल्हे में कोयला जलाकर रखते हैं और अक्सर दो बोगियों के बीच के  जुड़ाव की जगह पर चाय गर्म करते दिखाई देते हैं । यदि कोई यात्री इसका विरोध करता है, तो लडऩे पर भी उतारू हो जाते हैं । क्यायह रेलवे या जीआरपी की तरफ से तैनात सुरक्षा कर्मियों को दिखाई नहीं देता ? $ क्या यह उनकी इच्छा के बिना संभव  है ? 
भारतीय संसद में  रेल बजट प्रस्तुत करने के दौरान रेल मंत्री रेलवे से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में विश्व स्तरीय सुविधाआों के प्रस्तावों का जिक्र करते हैं । लेकिन इन आश्वासनों से क्या फायदा, जब रेल यात्रियों की सुरक्षा राम भरोसे हो । कहावत है-जान बची तो लाखों पाय । हर हादसे के बाद रेलवे की तरफ से मुआवजे की घोषणा की जाती है, इस बार भी हुआ । माना कि मुआवजा के रूप में मृतकों के परिजनों को दिये पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता कुछ समय के लिए उनकी रोटी को समस्या को टाल सकती है । परंतु यह कदम पारिवारिक सदस्य की क्षति पूर्ति नहीं कर सकता । इस लिए बेहतर तो यह है कि रेलवे पूर्व घटनाओं से सीख लेकर किसी भी तरह की सभी संभावित आशंकाओं के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त करे । यात्री विश्व स्तरीय सुविधा से पहले विश्व स्तरीय सुरक्षा ज्यादा पसंद करेंगे ।  
आज लोकल हो या एक्सप्रेस सभी तरह की रेल गाडिय़ों में फेरीवालों का जमघट लगा हुआ है । इन फेरीवालों के कारण होने वाली परेशानियों से मुक्त होने की उम्मीद छोड़ यात्री इनके साथ सामंजस्य बिठाने को विवश हैं । गाडिय़ों में रुपये मांगते किन्नरों की हरकतों से परिवार के साथ यात्रा करते शर्मसार होने की स्थिति से लगभग हर कोई कभी ना कभी गुजरा ही होगा। ना जाने कब इन समस्याओं से यात्रियों को मुक्ति मिलेगी ।

http://www.facebook.com/photo.php
?fbid=4476941768281&set=o.
423763474318439&type=1&theater